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देश में मुफ्त बिजली को लेकर सियासत ज्यादा, सुधार कम

कोरोना महामारी के काल में केंद्र ने जारी की थी बिजली सुधार की योजना

सुधार के लिए अतिरिक्त कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की योजना का 12 राज्य ही उठा सके हैं लाभ। 

देश में मुफ्त बिजली को लेकर सियासत ज्यादा, सुधार कम


 ब्यूरो, नई दिल्ली

मुफ्त बिजली पर राजनीति तो खूब हो रही है, लेकिन जब सुधार की बात होती है तो अधिकांश राज्यों के कदम आगे नहीं बढ़ पाते। यही वजह है कि बिजली सुधार करने वाले राज्यों को अतिरिक्त कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की योजना का फायदा अभी तक सिर्फ 12 राज्य ही उठा सके हैं।


उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु बंगाल, हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने 66,413 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद हासिल की है, जिससे इन्हें बिजली क्षेत्र की स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिली है। इस तरह से 17 राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने केंद्र की इस योजना का फायदा नहीं उठाया है। हो सकता है कि कुछ राज्यों को केंद्र की इस योजना की जरूरत

न हो, फिर भी पंजाब, बिहार, कर्नाटक, झारखंड जैसे राज्यों का इसमें शामिल न होना आश्चर्यजनक है।


केंद्र सरकार ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष 2023-24 में राज्य चाहें तो इस योजना का फायदा उठाते हुए 1,43,332 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय संसाधन प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी के काल में जारी की थी। इसका उद्देश्य राज्यों को अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना था लेकिन इसके लिए उन्हें बिजली क्षेत्र में दस तरह के सुधारवादी कदम उठाने थे।


इसमें बिजली की चोरी रोकने से लेकर

बिजली वितरण कंपनियों के काम- काज को ज्यादा पारदर्शी बनाना, राज्य में निश्चित अंतराल पर बिजली आडिट कराना, ग्राहकों को सिर्फ बैंक खाते के जरिये सब्सिडी देना, क्रास सब्सिडी को समाप्त करना, प्रीपेड मीटर लगाना आदि शामिल है। ये सभी कदम उठाने पर राज्यों को उनके कुल सकल घरेलू उत्पादन का 0.25 से 0.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त कर्ज लेने की सुविधा है।



इन राज्यों ने उठाया लाभ:

सरकार के आंकड़े बताते हैं कि इस सुविधा का सबसे ज्यादा फायदा बंगाल ने उठाया है। उसे पिछले दो वित्त वर्षों में 15,263 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लेने की छूट मिली। दूसरे स्थान पर राजस्थान है, जिसे 11,308 करोड़ रुपये मिले हैं। उत्तर प्रदेश को 6,823 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 9,574 करोड़ रुपये, केरल को 8,323 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 7,054 करोड़ रुपये मिले हैं। केंद्र सरकार की यह रिपोर्ट तब आई है, जब कई राज्यों में बिजली को लेकर खूब सियासत हो रही है। मुफ्त बिजली देने पर राजनीतिक पार्टियों का जोर बढ़ता जा रहा है।



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